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इलाहाबाद : इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बवाल, तोेड़फोड़ और आगजनी करने तथा अध्यापकों से बदसलूकी के आरोप में ब्लैक लिस्ट किए गए छात्र नीरज को हाईकोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने उसके विरुद्ध जारी कुलपति के आदेश 18 सितंबर 2017 को रद्द कर दिया है तथा उसके विरुद्ध की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को भी दूषित और नैसर्गिंक न्याय के विपरीत माना है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय अध्यादेश के तहत गठित अनुशासन समिति को छात्र को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देकर नए सिरे से आदेश पारित करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि छात्र संपूरक बहस भी लिखित रूप में दे सकता है। जिस पर कमेटी विचार करके स्पष्ट आदेश पारित करे।
नीरज सिंह पर लगे गंभीर आरोपों के मद्देनजर कोर्ट ने उसके विश्वविद्यालय में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को जारी रखने का आदेश दिया है। अनुशासन समिति की सुनवाई विश्वविद्यालय से बाहर गेस्ट हाउस में करने का निर्देश दिया है। नीरज सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने दिया। याचिका में कुलपति के 18 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई थी। कहा गया कि उसके खिलाफ कार्रवाई करते समय हाईकोर्ट 26 जुलाई 2017 के आदेश का सही भावना से पालन नहीं किया गया। याची द्वारा अपने पक्ष में दी गई सफाई पर विचार नहीं किया गया। कुलपति ने जांच समिति की रिपोर्ट पर बिना अपना विवेक इस्तेमाल किए मुहर लगा दी। जांच समिति की रिपोर्ट का विरोध करने का उसके अवसर नहीं दिया गया।
नीरज सिंह को विश्वविद्यालय परिसर में नौ फरवरी, आठ मार्च, 27, 28 अप्रैल और सात जुलाई 2017 को हुई अराजकता के आरोप में विश्वविद्यालय से प्रॉक्टर ने निष्कासित कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई जिस पर हाईकोर्ट ने छात्र को सुनवाई का अवसर देते हुए नियमानुसार आदेश पारित करने का निर्देश विश्वविद्यालय को दिया था। इसके बाद जांच समिति ने सुनवाई के बाद उसे दोषी पाया और कुलपति ने ब्लैक लिस्ट करने का आदेश दिया।
इलाहाबाद : इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बवाल, तोेड़फोड़ और आगजनी करने तथा अध्यापकों से बदसलूकी के आरोप में ब्लैक लिस्ट किए गए छात्र नीरज को हाईकोर्ट ने राहत दी है। कोर्ट ने उसके विरुद्ध जारी कुलपति के आदेश 18 सितंबर 2017 को रद्द कर दिया है तथा उसके विरुद्ध की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को भी दूषित और नैसर्गिंक न्याय के विपरीत माना है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय अध्यादेश के तहत गठित अनुशासन समिति को छात्र को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देकर नए सिरे से आदेश पारित करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि छात्र संपूरक बहस भी लिखित रूप में दे सकता है। जिस पर कमेटी विचार करके स्पष्ट आदेश पारित करे।
नीरज सिंह पर लगे गंभीर आरोपों के मद्देनजर कोर्ट ने उसके विश्वविद्यालय में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को जारी रखने का आदेश दिया है। अनुशासन समिति की सुनवाई विश्वविद्यालय से बाहर गेस्ट हाउस में करने का निर्देश दिया है। नीरज सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल ने दिया। याचिका में कुलपति के 18 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई थी। कहा गया कि उसके खिलाफ कार्रवाई करते समय हाईकोर्ट 26 जुलाई 2017 के आदेश का सही भावना से पालन नहीं किया गया। याची द्वारा अपने पक्ष में दी गई सफाई पर विचार नहीं किया गया। कुलपति ने जांच समिति की रिपोर्ट पर बिना अपना विवेक इस्तेमाल किए मुहर लगा दी। जांच समिति की रिपोर्ट का विरोध करने का उसके अवसर नहीं दिया गया।
नीरज सिंह को विश्वविद्यालय परिसर में नौ फरवरी, आठ मार्च, 27, 28 अप्रैल और सात जुलाई 2017 को हुई अराजकता के आरोप में विश्वविद्यालय से प्रॉक्टर ने निष्कासित कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई जिस पर हाईकोर्ट ने छात्र को सुनवाई का अवसर देते हुए नियमानुसार आदेश पारित करने का निर्देश विश्वविद्यालय को दिया था। इसके बाद जांच समिति ने सुनवाई के बाद उसे दोषी पाया और कुलपति ने ब्लैक लिस्ट करने का आदेश दिया।
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