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Sunday, September 24, 2017

*कैसे हुई देवीपाटन मंदिर के शक्तिपीठ की स्थापना*

शक्तिपीठ के रूप में प्रचलित देवीपाटन मंदिर उत्तर प्रदेश में बलरामपुर जिले के भारत नेपाल सीमा से सटे तुलसीपुर तहसील क्षेत्र के पाटन गांव मे सिरिया नदी के तट पर स्थित है। देवी पाटन मंदिर नेपाल सीमा से सटा होने के कारण अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। कैसे हुई इस शक्तिपीठ की स्थापना, क्या है इसकी कहानी ....

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दक्ष प्रजापति के यहाँ आयोजित अनुष्ठान में अपने पति इष्टदेव देवाधिदेव महादेव को न्योता और स्थान न दिए जाने से क्षुब्ध माँ जगदम्बा स्वयं को अग्नि को भेंट कर सती हो गई। माता के सती होने से आक्रोशित महादेव अत्यंत दुखी हुए और माता सती के शव को कंधे पर रखकर तांडव करने लगे।

शिव तांडव से धरती थर्राने लगी। इससे संसार मे व्यवधान उत्पन्न होने लगे। संसार को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सती के अंगो को सुदर्शन चक्र से खण्डित कर दिया और विभिन्न इक्यावन स्थानों पर गिरा दिया। जिन-जिन स्थानों पर माता के अंग गिरे वह स्थान शक्तिपीठ माने गए। मान्यता है कि पाटन गांव में मां जगदम्बा का बांया स्कंद पाटम्बर समेत गिरा। तभी से इसी शक्तिपीठ को मां पाटेश्वरी देवी पाटन मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां एक गर्भगृह भी स्थित है जहां माता सीता का पाताल गमन हुआ था ! यह स्थान सिद्ध पीठ के रूप में जाना जाता है ! मान्यता है कि मॉ पाटेश्वरी देवी के दर्शन व पूजा अर्चन से बिगड़े काम भी बन जाते हैं !
रिपोर्ट
रामकुमार सिंह
 कुशीनगर

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