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Saturday, March 4, 2017

श्री राम का चरित्र जहाँ आज पूरी दुनिया गाती है

वहीँ भारत में ही कुछ अधर्मी और विधर्मियो के द्वारा किये जा रहे दुष्प्रचार से मन द्रवित हो उठता हैं । श्री राम के चरित्र को गिराने की हर संभव कोशिश करते हैं वामपंथी । वो सवाल करते है क्या राम जी को सीता से प्यार था ? मैं उनसे पूछता हु क्या आपको श्री राम के आंसू तब नहीं दिखे थे जब माँ सीता के अपहरण के बाद वो व्याकुल हुए वन वन भटक रहे थे और सिर्फ सीते-सीते ही उनकी अधरों पे था । वो इतने व्याकुल थे की पशु , पक्षीयो यहाँ तक की पेड़ पौधों से भी पूछ रहे थे - "हे खग-मृग ! हे मधुकर श्रेणी ! तुम देखि सीता मृगनैनी" । वामपंथियो तुम्हे ये तो दिखा की श्री राम ने माँ सीता का त्याग किया किन्तु ये नहीं दिखा की उन्होंने उसके बाद खुद भी पूरे जीवन विवाह नहीं किया । यहाँ तक की अश्वमेध यज्ञ के लिए भी जब उन्हें आग्रह किया गया शादी के लिए तब भी वो नहीं माने और स्वर्ण की सीता जी बनवायी। उन्होंने एक राजा का कर्त्तव्य निभाते हुए की प्रजा में असंतोष न फैले इसलिये माता को त्यागा जरूर था लेकिन प्रेम सदैव उन्ही से किया । वो युग भी त्रेता था मित्रों , उस युग की बात ही अलग थी उस समय के ठोस आदर्श चरित्र पर चलना तो दूर हमारी समझ से भी बाहर है । जहाँ वचन की कीमत प्राण से बढ़कर थी , जहाँ एक भाई मिला हुआ राज ठुकरा के दूजे भाई की खड़ाऊ में सुख ढूंढता है । राम के आंसू वामपंथीओ को तब नहीं दिखेंगे जब वो माँ सीता के धरती में समां जाने पर तड़प उठे थे और धरती का अंत तक करने चले थे क्रोधाग्नि में। श्री राम का चरित्र एक आदर्श चरित्र था इसीलिए उन्हें पुरुषोत्तम कहा जाता है। मेरे हृदय से तो बस यही धुन निकलती है *श्री राम चंद्र कृपाल भज मन* .......

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